मध्य प्रदेश में केंद्र सरकार की एकीकृत पेंशन योजना (Unified Pension Scheme – UPS) को लेकर कर्मचारियों में कोई खास उत्साह नहीं दिख रहा है। पुरानी पेंशन बहाली (OPS) की लगातार उठती मांगों के बीच, राज्य सरकार ने राष्ट्रीय पेंशन योजना (NPS) के साथ यह नया विकल्प तो दिया है, लेकिन न अधिकारी और न कर्मचारी — किसी ने इसमें खास दिलचस्पी दिखाई है। अब स्थिति यह है कि न सरकार जल्दबाज़ी में है और न ही कर्मचारी कोई निर्णय लेने को तैयार हैं।
पेंशन व्यवस्था का नया मोड़: UPS बनाम NPS
केंद्र सरकार ने हाल ही में नई एकीकृत पेंशन योजना (UPS) लागू की थी, जिसे NPS के समानांतर एक विकल्प के रूप में पेश किया गया। मंशा यह थी कि कर्मचारियों को OPS जैसी सुरक्षा और NPS जैसी निवेश-लचीलापन दोनों का लाभ मिल सके।
लेकिन ज़मीनी हकीकत यह है कि मध्य प्रदेश में किसी भी कर्मचारी संगठन ने इस योजना को लेकर अब तक कोई पहल नहीं की है। राज्य के 4.6 लाख अधिकारी-कर्मचारी अभी भी NPS में ही शामिल हैं।
अखिल भारतीय सेवा के अधिकारी भी नहीं कर रहे विकल्प का चयन
यहां तक कि IAS, IPS और IFS जैसे अखिल भारतीय सेवा के अधिकारियों में भी इस योजना को लेकर कोई खास उत्साह नहीं दिखा। सूत्रों के अनुसार, केवल कुछ गिने-चुने अधिकारियों ने ही UPS चुनने का विकल्प चुना है, बाकी ने NPS को ही जारी रखने का निर्णय लिया है।
राज्य सरकार ने इस योजना के क्रियान्वयन के लिए एक उच्च स्तरीय समिति तो गठित कर दी है, लेकिन समिति की पहली बैठक तक अब तक नहीं हो पाई है। यह स्थिति साफ करती है कि राज्य सरकार अभी इस योजना को लेकर स्पष्ट नीति बनाने की प्रक्रिया में है, और जल्दबाज़ी नहीं करना चाहती।
NPS में लगातार किए जा रहे सुधार
जहां UPS ठंडी पड़ी है, वहीं राष्ट्रीय पेंशन योजना (NPS) में लगातार सुधार किए जा रहे हैं ताकि यह कर्मचारियों के लिए अधिक आकर्षक बन सके।
नए संशोधन के अनुसार:
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जो कर्मचारी जोखिम नहीं लेना चाहते, वे अब सरकारी प्रतिभूतियों (Government Securities) में 100% निवेश कर सकते हैं।
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म्यूचुअल फंड और इक्विटी जैसे विकल्पों में निवेश की सीमा 50% से बढ़ाकर 75% कर दी गई है।
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कर्मचारियों को यह अधिकार भी मिला है कि वे अपना फंड मैनेजर स्वयं चुन सकते हैं।
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एक वर्ष में फंड बदलने का मौका एक बार, और निवेश की पद्धति बदलने का मौका दो बार मिलेगा।
इस बदलाव से सरकार यह संकेत दे रही है कि वह NPS को और लचीला बनाकर कर्मचारियों को पुराने पेंशन मॉडल की ओर जाने से रोकना चाहती है।
पुरानी पेंशन बहाली की मांग अब भी जारी
कर्मचारियों के बीच पुरानी पेंशन बहाली (OPS) की मांग अब भी जीवित है।
राज्य कर्मचारी संगठनों का कहना है कि जब राजस्थान, छत्तीसगढ़ और दिल्ली जैसे राज्यों ने OPS लागू कर दी, तो मध्य प्रदेश को भी यह कदम उठाना चाहिए।
एकीकृत पेंशन योजना को लेकर उनका कहना है कि – “जब तक इस योजना में निश्चित लाभ और स्पष्ट गणना नहीं दी जाती, तब तक इसे स्वीकार करना जोखिम भरा होगा।” इसी अस्पष्टता के कारण न कर्मचारी कोई निर्णय ले पा रहे हैं और न सरकार इस योजना को तेज़ी से लागू करने के पक्ष में है।
मेरा नजरिया और जनता की राय
देखा जाए तो “एकीकृत पेंशन योजना” का उद्देश्य वाजिब था — NPS और OPS के बीच का संतुलन बनाना। लेकिन विश्वास की कमी और स्पष्टीकरण की अनुपस्थिति ने इसे कर्मचारियों के बीच अप्रासंगिक बना दिया है। मेरी राय में, जब तक सरकार पेंशन लाभ, प्रतिशत योगदान, और दीर्घकालिक गारंटी स्पष्ट नहीं करती, तब तक यह योजना सिर्फ कागज़ों में सीमित रहेगी।
वहीं NPS में सुधार के बावजूद, OPS जैसी “जीवनभर सुरक्षा” की भावना को कर्मचारी अब भी मिस करते हैं।
अगले वित्तीय वर्ष में सरकार का रुख क्या होगा – यह अब सबसे बड़ा सवाल है।
उदय पटेल “dspublicschools.in” वेबसाइट के संस्थापक हैं। डिजिटल मार्केटिंग एक्सपर्ट और क्रिएटिव लेखक, जो तकनीक और भविष्य की सोच पर लेख लिखते हैं।