MP News: मध्य प्रदेश की महिलाओं के लिए आज 12 नवंबर गर्व का दिन है। मध्य प्रदेश की मोहन सरकार ने लाडली बहना योजना के तहत अब तक ₹45,000 करोड़ से भी अधिक राशि महिलाओं के खातों में भेजी है — इस बात की घोषणा मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सोशल मीडिया पोस्ट में की है। इसके साथ उन्होंने रोजगारपरक उद्योगों में काम करने वाली ‘लाडली बहनों’ को ₹5,000 की अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि देने का भी बड़ा निर्णय लिया है। यह सिर्फ एक संख्या नहीं, बल्कि लाखों महिलाओं की आत्मनिर्भर बनने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
रोजगार में जुड़ी महिलाएं पाएंगी अतिरिक्त ₹5,000
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने एक ट्वीट/पोस्ट में कहा है कि:
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लाडली बहना योजना के तहत अब तक ₹45,000 करोड़ से भी अधिक राशि महिलाओं को प्रदान की जा चुकी है।
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साथ ही यह निर्णय लिया गया है कि जो महिलाएँ रोजगारपरक उद्योगों में कार्य करेंगी, उन्हें ₹5,000 की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।
यह घोषणा उनके लिए नए अवसर और सम्मान का संकेत है, जो सिर्फ आर्थिक सहायता पर नहीं बल्कि उनकी सक्रिय भागीदारी पर आधारित है।
लाड़ली बहनों को अब तक ₹45,000 करोड़ से अधिक की राशि प्रदान की जा चुकी है। इसके साथ ही जो बहनें रोजगारपरक उद्योगों में कार्य करेंगी, उन्हें ₹5,000 की प्रोत्साहन राशि देने का भी प्रदेश सरकार ने निर्णय किया है : CM@DrMohanYadav51 @mp_wcdmp #CMMadhyaPradesh #MadhyaPradesh… pic.twitter.com/AurWC3uDZv
— Chief Minister, MP (@CMMadhyaPradesh) November 12, 2025
योजना की प्रगति और राशि का आकड़ा
इस योजना ने शुरुआत के कुछ वर्षों में ही बड़ी छलांग लगाई है। कुछ प्रमुख बिंदु:
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इससे जुड़े लाभार्थियों की संख्या लगभग 1.26 करोड़ बताई जा रही है।
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इस राशि के माध्यम से महिलाओं ने छोटे-मोटे व्यवसाय शुरू किए हैं, बैंकिंग खाता खोलना आसान हुआ है, और आर्थिक भागीदारी में वृद्धि हुई है।
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यह भी कहा गया है कि 2028 तक मासिक सहायता राशि ₹3,000 तक बढ़ाई जाएगी।
इन आंकड़ों से यह साफ होता है कि सरकार इस योजना को सिर्फ सहायता देने तक सीमित नहीं रख रही, बल्कि इसे सशक्तिकरण की दिशा में ले जा रही है।
रोजगारप्रेमी महिलाओं को मिलेगा अतिरिक्त वेतन-प्रोत्साहन
मुख्यमंत्री मोहन यादव जी ने नई दिशा में यह कहा कि अब जो महिलाएँ उद्योगों में काम करेंगी, उन्हें सरकार की ओर से ₹5,000 की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।
यह कदम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि:
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यह सिर्फ लाभार्थी महिला को आर्थिक सहायता देने पर नहीं, बल्कि रोजगार की ओर प्रेरित कर रहा है।
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इससे महिलाओं का सामाजिक-आर्थिक रोल बदलने की संभावना है — घर के अंदर से बाहर-व्यापार, उद्योग में भागीदारी।
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विशेष रूप से जो महिलाएँ आत्म-निर्भर बनना चाहती हैं, उनके लिए यह एक नया अवसर है।
इसे कैसे लागू किया जाएगा – दिशा-निर्देश एवं चुनौतियाँ
योजना के क्रियान्वयन के लिए निम्न दिशा-निर्देश सामने आए हैं:
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आवेदन या पात्रता की शर्तें जल्दी अपडेट की जाएँ।
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रोजगारपरक उद्योग में शामिल महिलाओं को अलग-से मानदंड और ट्रैकिंग मिलेगी।
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बैंकिंग, ई-केवाईसी, आधार लिंकिंग आदि मामलों पर विशेष ध्यान।
हालांकि चुनौतियाँ भी हैं — जैसे ग्रामीण इलाकों में महिलाओं का उद्योग से जुड़ना, बैंकिंग पहुँच, जागरूकता, तथा प्रशासनिक प्रक्रिया।
यदि ये चुनौतियाँ समय से हल हों, तो इस प्रोत्साहन राशि का असर बहुत बड़ा होगा।
मेरा नजरिया और जनता क्या कहती है
मैं लेखक उदय पटेल मेरे अनुसार यह निर्णय इस लिहाज से बहुत सकारात्मक है कि सुरक्षा-सहायता पर निर्भर रहने वाले मॉडल से हटकर भागीदारी-उन्मुख मॉडल की ओर बढ़ा गया है। महिलाओं को सिर्फ पैसे मिलना ही नहीं, बल्कि काम करने का अवसर मिलना, यह बदलाव का संकेत है।
मेरी राय में — अगर सरकार नियमित ट्रैकिंग और समर्थन रखेगी तो यह कदम सिर्फ आज की राहत नहीं, बल्कि आने वाले वर्षों का डाटा बनने वाला है।
लेकिन असली परीक्षा तब होगी जब घरेलू-उद्योग, स्वरोजगार, बैंकिंग पहुँच इन सब क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी। तब ही यह राशि वास्तव में “स्वावलंबन” की दिशा में काम करेगी।
उदय पटेल “dspublicschools.in” वेबसाइट के संस्थापक हैं। डिजिटल मार्केटिंग एक्सपर्ट और क्रिएटिव लेखक, जो तकनीक और भविष्य की सोच पर लेख लिखते हैं।